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हारबंध एक चित्रालंकार का उदाहरण है। इस में
वृत्तबद्ध पद्य की रचना इस प्रकार की जाती है जिस से अक्षरों में क्रम
से हर चरण का पुष्प बनता है तथा पूरा पद्य एक पुष्पमाला। नीचे इस का एक
उदाहरण प्रस्तुत है। प.प.श्री स्वामिश्री के प्रमुख शिष्य
प.प.श्रीनरसिंह सरस्वती(दीक्षिक)स्वामी महाराज ने इस की रचना उन्हीं की
स्तुति में की है। |